कल सुबह 10:30 बजे जमानत की सुनवाई है। एफआईआर हिंदी में है, मुवक्किल का परिवार बाहर बैठा है, और आपको जमानत प्रार्थना पत्र आज रात तैयार करना है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और दिल्ली की कई अदालतों में यह प्रार्थना पत्र हिंदी में ही दाखिल होता है।
इंटरनेट पर ज़्यादातर "bail application format" अंग्रेज़ी में मिलते हैं, या उनमें केवल शीर्षक हिंदी में होता है। इस लेख में आपको पूरा हिंदी प्रारूप मिलेगा: मजिस्ट्रेट न्यायालय के लिए धारा 480 बीएनएसएस और सत्र न्यायालय के लिए धारा 483 बीएनएसएस के अंतर्गत, साथ में आधार, दस्तावेज़ों की सूची और आम गलतियाँ।
संक्षेप में: 1 जुलाई 2024 से दर्ज मामलों में जमानत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के अंतर्गत माँगी जाती है। जमानतीय अपराध में धारा 478, अजमानतीय अपराध में मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 480, और सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय के समक्ष धारा 483। पुरानी सीआरपीसी की धाराएँ 436, 437 और 439 अब इन्हीं धाराओं में हैं।
कौन सी धारा, कौन सा न्यायालय
| स्थिति | पुरानी धारा (CrPC) | नई धारा (BNSS) | न्यायालय |
|---|---|---|---|
| जमानतीय अपराध (bailable offence) | 436 | 478 | थाना या मजिस्ट्रेट; जमानत अधिकार के रूप में |
| अजमानतीय अपराध, मजिस्ट्रेट के समक्ष | 437 | 480 | मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट / न्यायिक मजिस्ट्रेट |
| सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय की विशेष शक्ति | 439 | 483 | सत्र न्यायालय / उच्च न्यायालय |
| अग्रिम जमानत (anticipatory bail) | 438 | 482 | सत्र न्यायालय / उच्च न्यायालय |
| 60/90 दिन में आरोप पत्र न आने पर डिफ़ॉल्ट जमानत | 167(2) | 187(3) | मजिस्ट्रेट |
| विचाराधीन बंदी की अधिकतम हिरासत | 436A | 479 | संबंधित न्यायालय |
ध्यान दें: 1 जुलाई 2024 से पहले लंबित मामलों पर धारा 531 बीएनएसएस के अनुसार पुरानी सीआरपीसी लागू रह सकती है। उससे पहले की एफआईआर में नया जमानत प्रार्थना पत्र किस संहिता में दें, इस पर उच्च न्यायालयों के मत अलग-अलग हैं, इसलिए अपने उच्च न्यायालय की वर्तमान स्थिति देख लें। बाकी धाराओं के लिए हमारी सीआरपीसी से बीएनएसएस तालिका देखें, या CrPC to BNSS converter में धारा संख्या डालें।
अपराध की धारा उस दिन के कानून से तय होती है जिस दिन अपराध हुआ। इसलिए 2023 की घटना की एफआईआर आज दर्ज हो तो उसमें आईपीसी की धारा हो सकती है, जबकि जमानत प्रार्थना पत्र बीएनएसएस के अंतर्गत होगा।
प्रारूप 1: मजिस्ट्रेट न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र (धारा 480 बीएनएसएस)
अपने न्यायालय की प्रथा के अनुसार शीर्षक, नाम और तथ्य बदलें।
न्यायालय श्रीमान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महोदय, [जनपद]
जमानत प्रार्थना पत्र संख्या ______ / 2026
[अभियुक्त का नाम] पुत्र [पिता का नाम], आयु लगभग __ वर्ष, निवासी [पूरा पता] ……… प्रार्थी / अभियुक्त
बनाम
राज्य [उत्तर प्रदेश / मध्य प्रदेश / …] ……… विपक्षी
अपराध संख्या: ______ / 2026, थाना: ______, जनपद: ______
धारा: ______ भारतीय न्याय संहिता, 2023प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 480 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, जमानत पर रिहाई हेतु
श्रीमान जी,
प्रार्थी निम्नलिखित निवेदन करता है:
1. यह कि प्रार्थी को उपरोक्त अपराध संख्या में दिनांक ______ को गिरफ्तार किया गया और वह दिनांक ______ से न्यायिक अभिरक्षा में ______ कारागार में निरुद्ध है।
2. यह कि प्रार्थी निर्दोष है और उसे रंजिशन / गलत तरीके से झूठा फँसाया गया है। [संक्षेप में बताएँ कि एफआईआर में प्रार्थी की क्या भूमिका बताई गई है और वह क्यों संदिग्ध है।]
3. यह कि प्रथम सूचना रिपोर्ट घटना के ______ दिन बाद, बिना किसी संतोषजनक कारण के, विलंब से दर्ज कराई गई है।
4. यह कि प्रार्थी के कब्ज़े से कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई है। [या बरामदगी की वास्तविक स्थिति लिखें।]
5. यह कि प्रार्थी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। [यदि है, तो उसका पूरा विवरण दें।]
6. यह कि प्रार्थी [जनपद] का स्थायी निवासी है, उसके फरार होने की कोई संभावना नहीं है, और वह साक्ष्य या गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा।
7. यह कि विवेचना [पूर्ण हो चुकी है / जारी है], और प्रार्थी को अब और अभिरक्षा में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
8. यह कि इस अपराध संख्या में प्रार्थी द्वारा कोई अन्य जमानत प्रार्थना पत्र इस न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय में न तो दाखिल किया गया है और न ही लंबित है। [यदि किया गया है, तो उसका विवरण और आदेश बताएँ।]
9. यह कि प्रार्थी जमानत की प्रत्येक शर्त का पालन करेगा और प्रत्येक तिथि पर न्यायालय में उपस्थित रहेगा।प्रार्थना
अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि प्रार्थी को उपरोक्त अपराध संख्या में जमानत पर रिहा करने की कृपा करें।
दिनांक: ______
स्थान: ______प्रार्थी
द्वारा अधिवक्ता
[नाम, पंजीकरण संख्या]
प्रारूप 2: सत्र न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र (धारा 483 बीएनएसएस)
जब मजिस्ट्रेट जमानत खारिज कर दे, या अपराध सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय हो, तब यह प्रार्थना पत्र सत्र न्यायालय में दिया जाता है। प्रारूप 1 की तरह ही लिखें, केवल ये बदलाव करें:
न्यायालय श्रीमान सत्र न्यायाधीश महोदय, [जनपद]
प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, जमानत पर रिहाई हेतु
…
यह कि प्रार्थी का जमानत प्रार्थना पत्र श्रीमान [मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट / न्यायिक मजिस्ट्रेट], [जनपद] द्वारा दिनांक ______ को निरस्त कर दिया गया, जिसकी प्रमाणित प्रति इस प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न है।
…
अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि प्रार्थी को उपरोक्त अपराध संख्या में जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित करने की कृपा करें।
गंभीर अपराधों में सत्र न्यायालय जमानत देने से पहले लोक अभियोजक (Public Prosecutor) को सुनवाई का अवसर देता है, और कुछ अपराधों में सूचनादाता या पीड़ित की उपस्थिति भी आवश्यक होती है। इसलिए पहली तारीख पर ही सुनवाई हो जाए, यह मानकर न चलें, और मुवक्किल के परिवार को भी यह पहले से बता दें।
जमानत के मज़बूत आधार (grounds)
हर मामले में सभी आधार नहीं लगते। केवल वही लिखें जो रिकॉर्ड से साबित हों:
- एफआईआर में प्रार्थी की भूमिका अस्पष्ट है या उसका नाम बाद में जोड़ा गया है
- एफआईआर दर्ज करने में बिना स्पष्टीकरण का विलंब
- कोई बरामदगी नहीं, या बरामदगी संदिग्ध
- कोई आपराधिक इतिहास नहीं
- सह-अभियुक्त को समान भूमिका में जमानत मिल चुकी है (समानता, parity)
- लंबी हिरासत, और आरोप पत्र दाखिल हो चुका है
- प्रार्थी महिला, नाबालिग, बीमार या अशक्त है (धारा 480 में इनके लिए विशेष प्रावधान है)
- स्थायी निवास, परिवार की ज़िम्मेदारी, नौकरी या व्यवसाय
अभी गिरफ्तारी नहीं हुई, पर आशंका है? तब नियमित जमानत नहीं, अग्रिम जमानत लगेगी। देखें हमारा हिंदी अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र प्रारूप (धारा 482 बीएनएसएस)।
60 या 90 दिन में आरोप पत्र नहीं आया? तब गुण-दोष पर बहस की ज़रूरत नहीं। धारा 187(3) बीएनएसएस में डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार है। गिनती और प्रारूप के लिए हमारी डिफ़ॉल्ट जमानत गाइड देखें।
साथ में लगाए जाने वाले दस्तावेज़
| दस्तावेज़ | क्यों |
|---|---|
| एफआईआर की प्रति | आरोप और धाराएँ |
| रिमांड आदेश / हिरासत का विवरण | कब से जेल में है |
| वकालतनामा (जेल से सत्यापित, यदि अभियुक्त जेल में है) | अधिवक्ता का अधिकार; वकालतनामा प्रारूप |
| शपथ पत्र (affidavit) | तथ्यों का सत्यापन; कई न्यायालयों में आवश्यक |
| पिछले जमानत आदेश की प्रमाणित प्रति | सत्र न्यायालय में धारा 483 के प्रार्थना पत्र के साथ |
| सह-अभियुक्त का जमानत आदेश | समानता (parity) का आधार |
| चिकित्सीय दस्तावेज़ | बीमारी का आधार हो तो |
| पहचान और निवास का प्रमाण | स्थायी निवास का आधार |
न्यायालय शुल्क (court fee) और टिकट हर राज्य में अलग हैं। अपने न्यायालय के नियम देख लें।
आम गलतियाँ जिनसे जमानत में देरी होती है
- 1 जुलाई 2024 के बाद के मामले में "धारा 437 / 439 सीआरपीसी" लिखना। सही धाराएँ 480 / 483 बीएनएसएस हैं।
- "धारा 482" को लेकर भ्रम: बीएनएसएस में 482 अग्रिम जमानत है। एफआईआर रद्द कराने (quashing) की धारा अब 528 है।
- पिछले जमानत प्रार्थना पत्र या उसके निरस्त होने की बात छिपाना। यह गंभीर गलती है।
- आपराधिक इतिहास के बारे में गलत कथन करना।
- एफआईआर पढ़े बिना पुराने प्रारूप से आधार कॉपी करना। हर आधार रिकॉर्ड से मेल खाना चाहिए।
- सत्र न्यायालय में मजिस्ट्रेट के निरस्ती आदेश की प्रमाणित प्रति न लगाना।
हिंदी-अंग्रेज़ी शब्दावली
| हिंदी | अंग्रेज़ी |
|---|---|
| जमानत प्रार्थना पत्र | Bail application |
| अग्रिम जमानत | Anticipatory bail |
| प्रार्थी / अभियुक्त | Applicant / Accused |
| विपक्षी | Opposite party / Respondent |
| अपराध संख्या | Crime number / FIR number |
| न्यायिक अभिरक्षा | Judicial custody |
| आरोप पत्र | Chargesheet |
| प्रतिभू / जमानतदार | Surety |
| निजी मुचलका / बंधपत्र | Personal bond |
| लोक अभियोजक | Public Prosecutor |
| निरस्त | Rejected |
अंग्रेज़ी में प्रारूप चाहिए? देखें BNSS bail application format, anticipatory bail format under Section 482 BNSS और मुफ्त जमानत प्रारूप।
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ड्राफ्ट केवल शुरुआत है। अंतिम प्रार्थना पत्र के तथ्य, धाराएँ और आधार अधिवक्ता की ज़िम्मेदारी हैं। एआई द्वारा सुझाए गए हर फ़ैसले को आधिकारिक स्रोत पर खोलकर जाँचें। देखें AI fake citations पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी।