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अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र का प्रारूप (Anticipatory Bail Format in Hindi): धारा 482 बीएनएसएस, 2026

JT

Juniorlawyer Team

October 25, 2026 · 10 min read

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मुवक्किल शाम को चैंबर में आता है। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है, पुलिस घर आ चुकी है, और उसे डर है कि कल सुबह गिरफ्तारी हो जाएगी। उसे जेल जाने से पहले राहत चाहिए। यही अग्रिम जमानत है: गिरफ्तारी से पहले न्यायालय से यह निर्देश लेना कि गिरफ्तारी की दशा में उसे जमानत पर रिहा किया जाए।

1 जुलाई 2024 से अग्रिम जमानत धारा 482 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) में है, जो पुरानी धारा 438 सीआरपीसी की जगह आई है। इस लेख में आपको सत्र न्यायालय के लिए पूरा हिंदी प्रारूप, शपथ पत्र, आधार, दस्तावेज़ों की सूची और आम गलतियाँ मिलेंगी।

संक्षेप में: अग्रिम जमानत केवल अजमानतीय अपराध में और केवल सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय से मिलती है। प्रार्थी को गिरफ्तारी की उचित आशंका दिखानी होती है। न्यायालय पुलिस पूछताछ में उपलब्ध रहने, गवाहों को प्रभावित न करने और बिना अनुमति देश न छोड़ने जैसी शर्तें लगा सकता है।

सबसे बड़ा भ्रम: "धारा 482"

पुरानी सीआरपीसी में धारा 482 उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति (एफआईआर रद्द कराना, quashing) थी। नई बीएनएसएस में धारा 482 अग्रिम जमानत है, और quashing अब धारा 528 में है।

विषयपुरानी धारा (CrPC)नई धारा (BNSS)
अग्रिम जमानत438482
एफआईआर रद्द कराना (अंतर्निहित शक्ति)482528
सत्र / उच्च न्यायालय से नियमित जमानत439483
मजिस्ट्रेट से नियमित जमानत437480
जमानतीय अपराध में जमानत436478
पुलिस के समक्ष उपस्थिति का नोटिस41A35(3)

इसलिए जब कोई कहे "482 लगा दो", तो ड्राफ्ट शुरू करने से पहले पूछ लें: अग्रिम जमानत या एफआईआर रद्द कराना? बाकी धाराओं के लिए CrPC to BNSS converter देखें।

अग्रिम जमानत कब माँगी जा सकती है

  • अपराध अजमानतीय हो। जमानतीय अपराध में जमानत अधिकार है (धारा 478), वहाँ अग्रिम जमानत की ज़रूरत नहीं।
  • गिरफ्तारी की उचित आशंका हो। केवल डर काफ़ी नहीं। एफआईआर, पुलिस नोटिस, शिकायत या कोई ठोस तथ्य बताएँ। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरबख्श सिंह सिब्बिया बनाम पंजाब राज्य (1980) में यही कहा था कि आशंका ठोस तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
  • एफआईआर दर्ज होना ज़रूरी नहीं, यदि गिरफ्तारी की आशंका ठोस तथ्यों पर आधारित हो।
  • कुछ अपराधों में अग्रिम जमानत नहीं: धारा 482(4) बीएनएसएस के अनुसार भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 और धारा 70(2) के आरोपों में यह प्रावधान लागू नहीं होता। एफआईआर की धाराएँ पहले जाँच लें।

गिरफ्तारी हो चुकी है? तब अग्रिम जमानत नहीं, नियमित जमानत लगेगी। देखें हमारा हिंदी जमानत प्रार्थना पत्र प्रारूप (धारा 480 और 483)।

कौन सा न्यायालय: सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय?

दोनों को अधिकार है, पर व्यवहार में पहले सत्र न्यायालय जाया जाता है। वहाँ से निरस्त होने पर उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया जाता है। सीधे उच्च न्यायालय जाने पर कई उच्च न्यायालय पूछते हैं कि पहले सत्र न्यायालय क्यों नहीं गए, इसलिए विशेष कारण हो तो प्रार्थना पत्र में लिखें।

प्रारूप: सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र (धारा 482 बीएनएसएस)

अपने न्यायालय की प्रथा के अनुसार शीर्षक, नाम और तथ्य बदलें।

न्यायालय श्रीमान सत्र न्यायाधीश महोदय, [जनपद]

अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र संख्या ______ / 2026

[प्रार्थी का नाम] पुत्र [पिता का नाम], आयु लगभग __ वर्ष, निवासी [पूरा पता] ……… प्रार्थी

बनाम

राज्य [उत्तर प्रदेश / मध्य प्रदेश / …] ……… विपक्षी

अपराध संख्या: ______ / 2026, थाना: ______, जनपद: ______
धारा: ______ भारतीय न्याय संहिता, 2023

अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 482 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

श्रीमान जी,

प्रार्थी निम्नलिखित निवेदन करता है:

1. यह कि विपक्षी / शिकायतकर्ता [नाम] द्वारा दिनांक ______ को थाना ______ पर उपरोक्त अपराध संख्या की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जिसमें प्रार्थी को अभियुक्त बनाया गया है। एफआईआर की प्रति संलग्न है।
2. यह कि उक्त अपराध अजमानतीय है और पुलिस दिनांक ______ को प्रार्थी के घर आई थी। प्रार्थी को उचित आशंका है कि उसे किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है।
3. यह कि प्रार्थी निर्दोष है और उसे [पारिवारिक / संपत्ति / व्यापारिक] विवाद के कारण रंजिशन झूठा फँसाया गया है। [संक्षेप में बताएँ कि आरोप क्यों संदिग्ध है।]
4. यह कि प्रथम सूचना रिपोर्ट घटना के ______ दिन बाद, बिना किसी संतोषजनक कारण के, विलंब से दर्ज कराई गई है।
5. यह कि प्रार्थी के विरुद्ध लगाए गए आरोप मुख्यतः दस्तावेज़ी हैं और प्रार्थी से अभिरक्षा में पूछताछ (custodial interrogation) की कोई आवश्यकता नहीं है।
6. यह कि प्रार्थी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। [यदि है, तो उसका पूरा विवरण दें।]
7. यह कि प्रार्थी [जनपद] का स्थायी निवासी है, [नौकरी / व्यवसाय] करता है, और उसके फरार होने की कोई संभावना नहीं है।
8. यह कि प्रार्थी विवेचना में पूर्ण सहयोग करेगा, पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर पूछताछ के लिए उपस्थित रहेगा, किसी गवाह को प्रलोभन या धमकी नहीं देगा, और न्यायालय की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेगा।
9. यह कि इस अपराध संख्या में प्रार्थी द्वारा कोई अन्य अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र इस न्यायालय, उच्च न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय में न तो दाखिल किया गया है और न ही लंबित है। [यदि किया गया है, तो उसका विवरण और आदेश बताएँ।]

प्रार्थना

अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि यह निर्देश देने की कृपा करें कि उपरोक्त अपराध संख्या में गिरफ्तारी की दशा में प्रार्थी को जमानत पर रिहा किया जाए। साथ ही, प्रार्थना पत्र के निस्तारण तक प्रार्थी के विरुद्ध कोई उत्पीड़क कार्यवाही न किए जाने का अंतरिम आदेश पारित करने की कृपा करें।

दिनांक: ______
स्थान: ______

प्रार्थी
द्वारा अधिवक्ता
[नाम, पंजीकरण संख्या]

शपथ पत्र (affidavit) का प्रारूप

न्यायालय श्रीमान सत्र न्यायाधीश महोदय, [जनपद]

अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र संख्या ______ / 2026, [प्रार्थी] बनाम राज्य

शपथ पत्र

मैं, [नाम] पुत्र [पिता का नाम], आयु __ वर्ष, निवासी [पता], शपथपूर्वक निम्न कथन करता हूँ:

1. यह कि शपथकर्ता उपरोक्त प्रार्थना पत्र का प्रार्थी है और मामले के तथ्यों से भली-भाँति परिचित है।
2. यह कि संलग्न प्रार्थना पत्र के प्रस्तर 1 से 9 के कथन शपथकर्ता के निजी ज्ञान में सत्य हैं।
3. यह कि इस अपराध संख्या में शपथकर्ता ने कोई अन्य अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र किसी न्यायालय में दाखिल नहीं किया है।

सत्यापन: मैं, उपरोक्त शपथकर्ता, सत्यापित करता हूँ कि इस शपथ पत्र के प्रस्तर 1 से 3 के कथन मेरे निजी ज्ञान में सत्य हैं, इसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया है और कुछ भी असत्य नहीं है।

दिनांक: ______ स्थान: ______

शपथकर्ता

अग्रिम जमानत के मज़बूत आधार

केवल वही लिखें जो रिकॉर्ड से साबित हो:

  • आरोप रंजिश, संपत्ति विवाद या पारिवारिक विवाद से उपजा है, और इसका कोई दस्तावेज़ या पुरानी शिकायत है
  • एफआईआर दर्ज करने में बिना स्पष्टीकरण का विलंब
  • मामला दस्तावेज़ों पर आधारित है, अभिरक्षा में पूछताछ की ज़रूरत नहीं
  • कोई आपराधिक इतिहास नहीं
  • प्रार्थी पहले से विवेचना में सहयोग कर रहा है या नोटिस पर उपस्थित हुआ है
  • सह-अभियुक्त को समान भूमिका में अग्रिम जमानत मिल चुकी है (समानता, parity)
  • स्थायी निवास, नौकरी, परिवार की ज़िम्मेदारी, उम्र या बीमारी

उद्धृत करने योग्य निर्णय: गुरबख्श सिंह सिब्बिया बनाम पंजाब राज्य (1980): अग्रिम जमानत का प्रावधान उदारता से पढ़ा जाए और आशंका ठोस तथ्यों पर आधारित हो। सिद्धाराम सतलिंगप्पा म्हेत्रे बनाम महाराष्ट्र राज्य (2011): अग्रिम जमानत देते समय विचारणीय बातें। सुशीला अग्रवाल बनाम राज्य (दिल्ली) (2020, संविधान पीठ): अग्रिम जमानत सामान्यतः किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं होती, जब तक न्यायालय विशेष कारण से ऐसा न करे। दाखिल करने से पहले निर्णय का मूल पाठ आधिकारिक स्रोत पर पढ़ें।

साथ में लगाए जाने वाले दस्तावेज़

दस्तावेज़क्यों
एफआईआर की प्रतिआरोप, धाराएँ और तारीख
पुलिस नोटिस / शिकायत की प्रतिगिरफ्तारी की आशंका का आधार
शपथ पत्रतथ्यों का सत्यापन
वकालतनामाअधिवक्ता का अधिकार; वकालतनामा प्रारूप
पुरानी रंजिश या विवाद के दस्तावेज़झूठे फँसाव का आधार
सह-अभियुक्त का अग्रिम जमानत आदेशसमानता (parity) का आधार
पहचान, निवास और नौकरी / व्यवसाय का प्रमाणफरार न होने का आधार
चिकित्सीय दस्तावेज़उम्र या बीमारी का आधार हो तो

न्यायालय शुल्क (court fee) और टिकट हर राज्य में अलग हैं। अपने न्यायालय के नियम देख लें।

न्यायालय द्वारा लगाई जाने वाली सामान्य शर्तें

धारा 482(2) बीएनएसएस के अनुसार न्यायालय ये शर्तें लगा सकता है:

  • पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर पूछताछ के लिए उपलब्ध रहना
  • मामले के किसी व्यक्ति को प्रलोभन, धमकी या वादा न करना
  • न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत न छोड़ना
  • धारा 480(3) के अंतर्गत लगाई जा सकने वाली अन्य शर्तें

मुवक्किल को ये शर्तें पहले से समझा दें। शर्त टूटने पर अग्रिम जमानत निरस्त हो सकती है।

आम गलतियाँ जिनसे अग्रिम जमानत नहीं मिलती

  1. 1 जुलाई 2024 के बाद के मामले में "धारा 438 सीआरपीसी" लिखना। सही धारा 482 बीएनएसएस है।
  2. "धारा 482" लिखकर एफआईआर रद्द कराने (quashing) की माँग करना। quashing अब धारा 528 है।
  3. आशंका का कोई ठोस आधार न बताना, केवल "प्रार्थी को डर है" लिख देना।
  4. पिछले अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र या उसके निरस्त होने की बात छिपाना।
  5. धारा 482(4) में वर्जित अपराधों (बीएनएस धारा 65 और 70(2)) में प्रार्थना पत्र दाखिल करना।
  6. गिरफ्तारी हो जाने के बाद भी अग्रिम जमानत पर अड़े रहना। तब नियमित जमानत लगेगी।

हिंदी-अंग्रेज़ी शब्दावली

हिंदीअंग्रेज़ी
अग्रिम जमानतAnticipatory bail
गिरफ्तारी की आशंकाApprehension of arrest
अभिरक्षा में पूछताछCustodial interrogation
अंतरिम संरक्षणInterim protection
उत्पीड़क कार्यवाहीCoercive action
अजमानतीय अपराधNon-bailable offence
विवेचनाInvestigation
शपथ पत्र / सत्यापनAffidavit / Verification
निरस्तRejected / Cancelled

अंग्रेज़ी में विस्तृत प्रारूप चाहिए? देखें Anticipatory bail application format under Section 482 BNSS और मुफ्त अग्रिम जमानत प्रारूप।

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ड्राफ्ट केवल शुरुआत है। अंतिम प्रार्थना पत्र के तथ्य, धाराएँ और आधार अधिवक्ता की ज़िम्मेदारी हैं। एआई द्वारा सुझाए गए हर निर्णय को आधिकारिक स्रोत पर खोलकर जाँचें। देखें AI fake citations पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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